Babadham Kosamnara – Raigarh Sri Sri Satyanarayana Baba

Babadham Kosamnara – Raigarh – Baba Sri  Sri Satyanarayana Baba -बाबाधाम कोसमनारा -रायगढ़ – बाबा श्री श्री सत्यनारायण बाबा – The most prevalent in the news of Raigad is Babadham Kosamnara – Sri Sri Satyanarayana Baba – having been meditating for 23 years without consuming food, devotees are recognized as Shiva devotees.

Babadham Kosamnara – Raigarh – Baba Sri Sri Satyanarayana Baba

हमारे हिन्दू शास्त्रों में पहले भी बताया गया है की हमारे देवी- देवता, ऋषि मुनि हो या भक्तगण सभी अपने मनोकामना या भक्ति  के वशीभूत होकर कई वर्षों अपने ईष्ट देव की तपस्या किया करते थे। यही सच्चाई आज के युग में देखने मिलती है।  
यह सच्चाई है श्री सत्यनारायण बाबा की जो छत्तीसगढ़ राज्य के रायगढ़ जिले के समीप कोसमनारा गाँव में पिछले 23 वर्षों से बिना अन्न ग्रहण किये बाबा शिव की आराधना में लीं है।  यह भी माना जाता है की बाबा साक्षात भोले का ही रूप है। 

जन्म स्थान 

बताया जाता है की बाबा का जन्म Babadham Kosmanara – Raigarh – Baba Sri Sri Satyanarayana Baba -बाबाधाम कोसमनारा -रायगढ़ – बाबा श्री श्री सत्यनारायण बाबा से लगभग 18-19 की.मी. दूर डूमरपाली देवरी  के एक किसान परिवार में 12 जुलाई 1984 को हुआ था।  
बचपन से ही वो शिव की उपासना करते थे। और यह भी बताया जाता है की एक बार वह 7 दिन व् 7 रात तक गाँव के नजदीक शिव मन्दिर में ताप में लीं थे और उन्हें बढ़ी मुश्किल से समझा बुझा कर घर वापस लाना पड़ा था। 
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शिव की तलाश   

कहते है की 14 वर्ष की उम्र में वह स्कुल जाने के लिए घर से निकले जरुर थे पर घर नहीं लौटे, माना जाता है की 16 फरवरी 1998 को वे स्कुल जाने के बजाय सीधे अपने अराध्य की खोज में निकाल पड़े, और 18-19 की.मी. दूर कोसमनारा में उन्होंने पाया की यही वह जगह है जहाँ वे अपने तपोबल से भगवान शिव की आराधना कर उन्हें पा सकते है। 
वहीँ उन्होंने एक सुनसान जगह पर पत्थरों को इकठ्ठा कर शिवलिंग का रूप देकर आराधना करने लगे। 
ऐसे में वहाँ के नागरिक उन्हें अपने डर की वजह से उन्हें जाने पर विवश करने लगे पर यह संभव हो ना सका तब गाँव के लोगो ने प्रशाशन का सहारा लिया किन्तु प्रशासन भी हताश हो गई। 
पर बाबा अपने ही धुन में आराधना में व्यस्त थे। इस तरह खबर चारों ओर फैलने लगी और भक्तों की कतार उन्हें देखने के लिए उमड़ पड़ी. यह सब देखकर प्रशासन को मज़बूरी वाश बाबा की सुरक्षा के मद्दे नजर उनकी देखभाल करनी पड़ी। 

भक्तों का सैलाब 

कहा जाता है की उनकी ख्याति बढ़ने का कारण यह था की जो जीभ उन्होंने अपने भक्ति स्वरूप काटकर शिवलिंग के सामने रखी थी उसका प्रत्यक्ष लोगो का देखना ही था।  
यह सब देखकर वहाँ आये सभी आश्चर्य चकित हुए और उन्हें इस युग में भगवान का परम भक्त मानने लगे। 
Babadham Kosamnara - Raigarh - Baba Sri Sri Satyanarayana Baba
यह आज भी रहस्य है की बाबा कब अपनी समाधी से बाहर आते है और कब भोजन ग्रहण करते है क्यूंकि आज तक हमें बताने वाला कोई नहीं मिला।  

कहते है की बाबा जब ताप निद्रा से जागते है तो भक्तों से इशारों में बात करते है और जिनसे बात करते है वो स्वयं को धन्य मानते है। 
प्रशासन ने यह सब देखते हुए Babadham Kosmanara – Raigarh – Baba Sri Sri Satyanarayana Baba -बाबाधाम कोसमनारा -रायगढ़ – बाबा श्री श्री सत्यनारायण बाबा  हर चीज की व्यवस्था की है । 
चाहे वह पानी , बिजली हो या अन्य जरुरत की चीजें, यहाँ तक की बाबा और उनके भक्तों के रहने के लिए आवास की भी व्यवस्था की गई है।  
परन्तु बाबा के कथानुसार आज भी बाबा जहाँ अपनी समाधी में बैठते है वहाँ छत का निर्माण नहीं किया गया है, क्यूंकि बाबा खुले आसमान के निचे ही अपनी तपस्या करना चाहते है। 
ऐसे में बाबा छत्तीसगढ़ की तेज धुप, ठण्ड एवं बारिश सभी का कष्ट झेलते हुए अपनी तपस्या करते है। 
यह सब सुनकर और देखकर लगता है की आज भी इस संसार में भगवान की उपस्थिति है जो किसी न किसी रूप में \”Babadham Kosmanara – Raigarh – Baba Sri Sri Satyanarayana Baba -बाबाधाम कोसमनारा -रायगढ़ – बाबा श्री श्री सत्यनारायण बाबा \” हमें यह बतलाती है की धर्म की स्थापना कायम रहें और आपसे भाईचारा बने रहे। 

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